अजय और तब्बू की दिमागी जंग- दृश्यम

​एक आज़माई हुई सुपरहिट कहानी का रीमेक बनाने के बावजूद निर्देशक निशिकांत कामत पता नहीं क्यूं फिल्म के पहले हिस्से की कछुआ चाल को रफ्तार नहीं दे पाए। लेकिन हां.. अगर आपने वो बोरियत झेल ली तो इंटरवेल के बाद फिल्म आपको कुर्सी से बांध देगी। मैं बात कर रहा हूं 31 जुलाई को रिलीज़ हो रही ‘दृश्यम’ की जिसमें हिंदी सिनेमा के दर्शक सोलह साल बाद अजय देवगन और तब्बू को एक साथ रूपहले पर्दे पर देखेंगे।    

विजय सलगावंकर (अजय देवगन) गोवा के एक दूरदराज गांव में रहने वाला शरीफ सा केबल ऑपरेटर है जिसका परिवार ही उसकी दुनिया है। वो अपनी पत्नी (श्रिया सरन) और प्यारी सी दो बेटियों (इशिता दत्ता और मृणाल जाधव) पर जान छिड़कता है। लेकिन अचानक एक दिन उसकी हंसती-खेलती ज़िंदगी में आता है एक तूफान। परिवार को बचाने के लिए विजय शराफत का चोला फेंककर एक शातिर अवतार अख्तियार करता है और सूबे की तेज़तर्रार आईजी मीरा देशमुख (तब्बू) से लड़ता है एक दिलचस्प दिमागी जंग।

बेहद महीन तरीके से बुनी गई कहानी की खास बात ये है कि दर्शक के तौर पर आप उस राज़ को शुरुआत से जानते हैं जिसे तलाशने में गोवा की पूरी पुलिस फोर्स बेहाल है। आपकी दिलचस्पी इस बात में है कि क्या पुलिस उसका पता लगा पाएगीफिर पुलिस भी विजय की पूरी चाल समझ जाती है। अब आप सोच रहें कि क्या पुलिस उसके लिए सबूत जुटा पाएगी? और आखिर में इन बेचैन सवालों के जवाब में आता है है एक झन्ना देने वाला क्लाइमेक्स।

यूं तो अजय देवगन ने ओंकारा, ज़ख्म, कंपनी, गंगाजल जैसी दर्जनों फिल्मों में कई संजीदा रोल किए हैं लेकिन ‘दृश्यम’ देखकर मुझे याद आई अजय की ‘दीवानगी’। 2002 की उस फिल्म में पहली बार नेगिटिव रोल करते हुए अजय ने अपनी अदाकारी का अलग रंग बिखेरा था। पिछले तेरह सालों में एक एक्टर के तौर पर आई परिपक्वता ‘दृश्यम’ के विजय में थोड़ी-बहुत दिखती है। लेकिन तब्बू हमेशा की तरह बेमिसाल हैं। फिल्म के आखिरी सीन में तब्बू का चेहरा जिज्ञासा, बेचारगी, गुस्से और नफरत जैसे भावों का मुज़ायरा बेहतरीन तरीके से करता है- बगैर किसी अल्फाज़ के।

2013 में पहली बार सुपर स्टार मोहन लाल के साथ मलयालम में बनी जीथू जोसेफ की ‘दृश्यम’ ने कामयाबी के झंड़े गाड़े। फिल्म का तमिल रीमेक इसी महीने ‘पापनाशम’ के नाम से रिलीज़ हुआ। मुख्य भूमिका में सदाबहार कमल हसन के साथ फिल्म बंपर हिट चल रही है। लेकिन हिंदी दर्शकों का मनमौजी रवैया भी इस थ्रिलर-ड्रामा को वही इज़्जत बक्शेगा कहना ज़रा मुश्किल है।

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